Chapter 3: कंप्यूटर मेमोरी क्या होता है (What is Memory in Computer in Hindi)

कंप्यूटर मेमोरी क्या होता है (What is Memory in Computer in Hindi): बच्चों, आज में आपको “What is Memory in Computer in Hindi” के बारे में विस्तार से बताने जा रहा हूँ. मनुष्य में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी तरह कंप्यूटर में डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी (Memory) होती है. यह मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (C.P.U) का अभिन्न अंग है, इसे कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं.

मेमोरी (Memory)

मेमोरी, कंप्यूटर की स्टोरेज यूनिट है. यह कंप्यूटर का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है. इसमें हम डाटा प्रोग्राम इत्यादि को स्टोर कर सकते हैं. इसको नापने की साइज के आधार पर कई यूनिट है. बाईट किलाबाईट, मेगाबाईट , गीगाबाईट एवं टेराबाईट इसमें सबसे छोटी यूनिट बाईट एवं सबसे बड़ी यूनिट टेराबाईट होती है.

बिट अथवा बाइट: मेमोरी में स्टोर किया गया डाटा 0 या 1 के रूप में परिवर्तित हो जाता है 0 तथा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी डिजिट कहा जाता हैं| संक्षेप में इन्हें बिट भी कहा जाता हैं| यह बिट कंप्यूटर कि मेमोरी में घेरे गे स्थान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं|

  • 8 Bits = 1 Bytes
  • 1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)
  • 1024 KB = 1 Megabyte (1MB)
  • 1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)
  • 1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)

यह दो प्रकार की होती है |

  1. Primary Memory
  2. Secondary Memory

प्राइमरी मेमोरी

मेमोरी को Main Memory भी कहा जाता है. इसके दो प्रकार हैं:

  1. RAM
  2. ROM

RAM

इसका पूरा नाम Randam Access Memory  है.

इसकी निम्न विशेषताएँ होती है जो निम्नलिखित है:

  • इसको कंप्यूटर की प्रमुख मैमोरी कहा जाता है.
  • यह अस्थाई (Temprory) मैमोरी होती है अर्थात इसमें स्टोर डाटा कंप्यूटर बंद होने पर डिलीट हो जाता है. जिसका पुन: प्राप्त नहीं किया जा सकता है.
  • यह voletile Memory कहलाती है.
  • यह Semiconditor or File Flop से मिलकर बनी मेमोरी होती है.

यह निम्न प्रकार की होती है. जैसे: SRAM, DRAM, SDRAM etc.

SRAM:– इसका पूरा नाम Staic Randam Access Memory है. यह Flip Flop से मिलकर बनी होती है. इसलिए यह काम Refresh होती है.

DRAM:– इसका पूरा नाम Dyanamic Randam Access Memory है. यह मैमोरी जल्दी जल्दी रिफ्रेस होती है. Refresh का मतलब Electronic charge orDischarge से होता है. यह एक सेकंड में हजारों बार रिफ्रेश होती है. अतः इसकी गति धीमी होती है.

SD RAM:- इसका पूरा नाम Synchronous Dynamic Random Access Memory है.

NV RAM:– इसका पूरा नाम Non Voletile Randam Access Memory है. इस रेम का प्रयोग नेटवर्क डिवाइस में हार्डडिस्क के रूप में किया जाता है. यह एक महंगी मैमोरी होती है.

ROM (Read Only Memory)

ROM का पूरा नाम Read Only Memory है. यह कंप्यूटर की Primary Memory होती है. यह स्थाई (Permanent) मैमोरी होती है. इसमें कंप्यूटर को स्टार्ट करने वाले प्राथमिक प्रोग्राम एवं सेटिंग होती है.

यह तीन प्रकार का होता है:

  1. PROM:- इसका पूरा नाम Erasable Read Only Memory है. इस चिप में एक बार प्रोग्राम स्टोर किया जा सकता था. यदि प्रोग्राम में त्रुटी (Error) होने पर उसमें कोई सुधार नहीं किया जा सकता था.
  2. EPROM:– इसका पूरा नाम Erasable Programable Read Only Memory है. इस चिप में स्टोर प्रोग्राम में सुधार किया जा सकता था . चिप में सुधार करने के लिए चिप को बोर्ड से निकाल कर पराबैगनी (ultraviolet Ray) के सामने रखा जाता था.
  3. EEPROM:– इसका पूरा नाम Electronic Erasable Read only Memory है. इस चिप ने EPROM की समस्या को दूर किया है. इस चिप में स्टोर प्रोग्राम एवं डाटा में सुधार करने के लिए विधुत का प्रयोग किया गया था. आजकल के मदरबोर्ड में इसी रोम का प्रयोग किया जा रहा है.

सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस

Secondary Storage device को Auxiliary storage Device भी कहा जाता है . यह कंप्यूटर का आन्तरिक (Internal) भाग नहीं होता है. इसकी Storage छमता अधिक होती है तथा इसे हम घटा-बढ़ा सकते हैं. डाटा को ऐक्सेस करने की गति Primary Memory से धीमी होती है.

डाटा ऐक्सेस करने के आधार पर यह तीन प्रकार की होती है |

  1. Sequential Access Storage device: इस क्रिया में storage Data को उसी कर्म में ऐक्सेंस किया जाता है जिस कर्म में स्टोर किया जाता है | चुम्बकीये टेपद इसी का उदाहरण है |
  2. Index Sequential Access Medhod: इसमें डाटा को sequential Access Method से ही डाटा को ऐक्सेस किया जाता है | लेकिन इसमें डाटा को स्टोर करते समय एक इंडेक्स तयार कर लिया जाता है |
  3. Direct Access Method: इसमें डाटा को किसी भी कर्म में ऐक्सेस किया जा सकता है एवं किसी भी कर्म में डाटा को स्टोर किया जा सकता है | इसकी ऐक्सेस गति सीरियल एक्सेस की तुलना में अधिक होती है |

स्टोरेज डिवाइस के प्रकार:

  1. Megnetic Tape :- Megnetic Tape एक स्थाई द्वत्तियक स्टोरेज डिवाइस है. इसमें एक प्लास्टिक के टेप पर चुम्बुकीय पदार्थ (Megnetic Oxide) का लेपन रहता है|
  2. कार्टेज टेप (cartridge tape):- इस tape की चौड़ाई चुम्बकीय टेप से कम होती है. 1970 के दसक के अंत में घरेलु कम्प्यूटरों में काम्पेक्ट कैसेट का प्रयोग किया जाता है.
  3. चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk): आजकल डाटा को स्टोर करने के लिए कम्प्यूटरों में चुम्बकीय डिस्क का प्रयोग किया जा रहा है.

चुम्बकीय डिस्क दो प्रकार की होती है |

  1. Floppy Disk
  2. Hard Disk

फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk): फ्लॉपी डिस्क को डिक्केट या केवल फ्लॉपी भी कहा जाता है | इसका प्रयोग माइक्रो कंप्यूटर में होता है | यहाँ आकार एवं साइज के आधार पर दो प्रकार की होती है |

  1. Mini Floppy:- यह आकार में 51/2 इंच की होती है, संग्रहण छमता 1.2 MB होती है | इनकी Drive भी आकार में इसी की आकर की होती है |
  2. Micro Floppy:- यह आकर में 3½ इंच की होती है. इनकी संग्रहण छमता 1.4 MB होती है |

हार्ड डिस्क (Hard Disk): हार्ड डिस्क का विकास कम्प्यूटर मैं डाटा को स्टोर करने के लिए किया गया था आजकल इसका प्रयोग कम्प्युटर से आगे बढ़कर कई छेत्रों में हो रहा है |

डिस्क की प्लेट में Track and Sector होते है. सेक्टर में डाटा स्टोर होता है. एक सेक्टर में 512 बाईट डाटा स्टोर होता है |

डाटा को स्टोर एवं पढने करने के लिए तीन तरह के समय लागते हैं जो निम्न है:

  1. Seek Time:- डिस्क में डाटा को रीढ या राईट करने वाले track तक पहुंच में लगा समय सीक टाइम कहलाता है.
  2. Letancy time:– Track में डाटा के sector तक पहुँच में लगा समय लेटेंसी टाइम कहलाता है.
  3. Transfer Rate:– Sector में डाटा को लिखने एवं पढने में जो समय लगता है. उसे transfer Rate कहा जाता है.

ऑप्टिकल डिस्क : ऑप्टिकल डिस्क वे डिस्क होती है. जिसमे डाटा को रीड और स्टोर करने के लिए लाइटा का प्रयोग का प्रयोग किया जाता है | ऑप्टिकल डिस्क कहलाती है. इस डिस्क में एक रासायनिक पदार्थ का लेप रहता है.                           

Chapter 1: कंप्यूटर सामान्य परिचय (Computer Basics in Hindi) Chapter 2: कंप्यूटर का विकास (Development of Computer)

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