Chapter 4: इनपुट और आउटपुट डिवाइस (Input and Output Device)

इनपुट और आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर का महत्वपूर्ण पार्ट है, पिछले Chapter में हमने कंप्यूटर मेमोरी के बारे में पढ़ा था. आज हम इनपुट और आउटपुट डिवाइस (Input and Output Device) के बारे में जानेंगे. हमने देखा है कि बहुत से बच्चें “Input and Output Device in Hindi” इन्टरनेट पर बहुत ज्यादा सर्च करते हैं.

इनपुट-युक्तियाँ (Input devices)

मानवीय निदेशों को कंप्यूटर के समझने योग्य संकेतों में परिवर्तित करने के लिए जिन युक्तियों का प्रयोग किया जाता है उन्हें इनपुट युक्तियाँ कहते हैं. जैसे – कीबोर्ड, माऊस इत्यादि.

 इनपुट डिवाइस के प्रकार

  1. Oline
  2. Offline

Online input device:-  वे डिवाइस जो कंप्यूटर से कनेक्ट होकर डाटा को इनपुट करने का कार्य करती है ऑनलाइन इनपुट डिवाइस कहलाती है.

जैसे:

  1. Keyboard
  2. Scanner
  3. Joy Strick
  4. Track ball
  5. Digital Tablet
  6. MICR
  7. OCR
  8. OMR
  9. BCR
  10. Light pen
  11. Touch screen
  12. Vioce Recognition

Key Board (की बोर्ड)

यह सबसे ज्यादा प्रयोग की जाने वाली आनलाईन इनपुट डिवाइस है. इससे Text, Number, Symbol आदि के कंप्यूटर के अंदर इनपुट किया जाता है .एक स्टार्ट  कीबोर्ड में 101 की होती है कीबोर्ड की को चार भागों में बाँटा गया है.

1. Function key

2. Alfa – Numeric Keypad

3. Numeric Key pad

4. Special Key pad

1. Function key:- यह की कीबोर्ड में सबसे ऊपर होती है. इसकी संख्या बारह होती है (F1 – F2) होती है.

  • F1 कंप्यूटर पर काम करते समय हमें मदद की आवश्यकता होती है.
  • F2 कंप्यूटर पर इस कुंजी की सहायता से किसी भी फोल्डर एवं फाइल का नाम बदल सकते हैं.
  • F3 कंप्यूटर पर इस कुंजी की सहायता से किसी भी फोल्डर फाइल चित्र आदि को खोजने के लिए काम में लिया जाता है.
  • F4 कंप्यूटर पर इस कुंजी की सहायता इन्टरनेट एक्सप्लोर में एड्रस बार खुल जाएगी  और ALT के साथ F4 दबाने से चालू प्रोग्राम बंद हो जायेगा.
  • F5 कंप्यूटर की इस कुंजी की सहायता से तजा (Refresh) कर सकते है और वेब पेज को दोबारा लोड कर सकते है.
  • F6 वर्ड में काम करते समय इस कुंजी को दो बार दबाने से मेनू बार सक्रिय हो जाती है.
  • F7 वर्ड में काम करते समय वर्तनी और व्याकरण से सम्बन्धिगलती को सुधरने के लिए इस कुंजी की सहायता ली जाती है.
  • F8 कम्प्यूटर में विंडो लोड करते समय इस कुंजी को दबाकर बूत प्रक्रिया चालू की जा सकती है.
  • F9 वर्ड में इस कुंजी की सहायता से सलेक्सन को हटाया जाता है और यह बूट प्रक्रिया चालू करने के काम में भी ली जाती है.
  • F10 कम्प्यूटर पर इस कुंजी की सहायता प्रोग्राम की मेनू बार को सक्रिय करने के काम में ली जाती है. शिफ्ट के साथ F10 दबाने से डेस्कटॉप पर Right Click का कार्य करता है.
  • F11 इन्टरनेट एक्सप्लोर में काम करते समय इस कुंजी की सहायता से इंटर एक्सप्लोर को कुल स्क्रीन पर देखा जा सकता है.
  • F12 वर्ड में कार्य करते समय इस कुंजी की सहायता से Save as विंडो खुल जाती है और फाइल को सेव कर सकते हैं.

Alfa-Numeric keypad:- यह कीबोर्ड के मध्य का हिस्सा होता है यह पार्ट सबसे महत्मपूर्ण की होती है. इससे A TO Z, a TO z, 0 To 9 ~  ! @ # $ % ^ & *()

Numeric key:- यह key बोर्ड में दाये तरफ होती है. इसमें कुल 17 की होती है.

Special key:- इनकी संख्या कीबोर्ड में कम होती है इनसे कम्प्यूटर के Special कार्य किये जाते हैं.

जैसे: Screen Printing, Scroll, Lock, Insert, Power, Button, Home, end, Insert, etc.

 Mouse (माउस)

यह GUI interface में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली Pointer Input डिवाइस है. इसका विकास 1980 के दसक के बाद किया गया था. इसका आकर माउस के समान होने के कारण इसे माउस  कहा जाता है. इसमें कुल तीन बटन होते हैं. Left and Right Button और बीच में एक Scroll Button होता है.

माउस तीन प्रकार के होते हैं:

  1. Mechanicle Mouse
  2. Opticle Mouse
  3. Wrieless Mouse

1. Mechanicle mouse (यांत्रिक माउस): इस माउस का प्रयोग 1990 के दसक में किया जाता था. इसमें एक रबर की गेंद होती थी जो माउस की खोल से थोड़ी बाहर निकली रहती थी.  

2. Opticle mouse (प्रकाशीय माउस): Opticle Mouse एक नये प्रकार के माउस है आजकल इन माउस का प्रयोग सबसे ज्यादा हो रहा है.

3. Cardless Mouse: यह आज के आधुनिक युग के माउस है. यह फ्रिक्वेन्सी के आधार पर कार्य करते हैं. इसमें दो प्रमुख कम्पोनेन्टस Transmitter and Reciever होते हैं. यह Electromagnetic Singnal के रूप में माउस की गति तथा Click करने की सुचना कंप्यूटर को भेजी जाती है रेसिएवर कंप्यूटर में जोड़ा जाता है. इसमें इसके ड्राईवर को कंप्यूटर में इनस्टॉल करना परता है. आज के कंप्यूटर में यह इन बिल्ड भी होता है.

हम माउस के साथ कई प्रकार की क्रियाएं करते है

Pointing:- जब हम माउस को इधर-उधर खिसका कर माउस Pointer को अपने डेस्कटॉप के किसी भी आइकॉन पर ले जाते हैं तो इसे पॉइंट करना कहा जाता है.

क्लिकिंग (Clicking):- जब हम माउस पॉइंटर को किसी आइकॉन या प्रोग्राम पर लाकर माउस के दायें बटन को एक बार दबा कर छोड़ देते हैं, तो उस क्रिया को Click करना कहा जाता है.

डबल क्लिकिंग (Double clicking):– जब हम माउस के बांए बटन से जल्दी-जल्दी दो बार Click करतें हैं, तो उस क्रिया को Double click करना कहा जाता है.

राइट क्लिकिंग (Right clicking):- जब हम माउस Pointer को किसी आइकॉन या प्रोग्राम पर लाकर माउस के दाएं बटन को Click करते हैं, तो इस क्रिया को राइट क्लिक करना कहा जाता है.

Dragging:- जब हम पॉइंटर को किसी आइकॉन पर लाकर माउस के बांए बटन को दबाकर पकड़ लेते हैं और माउस बटन को दबाये रखकर ही माउस पॉइंटर को इधर उधर सरकाते हैं, तो इस क्रिया को खींचना या ड्रैग कहा जाता है |

 Scanner (स्कैनर)

स्कैनर एक ऑनलाइन इनपुट डिवाइस है. इससे हम सुचना एवं डाटा को कम्प्यूटर के अन्दर सीधे इनपुट कर सकते हैं. इससे किसी भी किताब फोटो एवं अन्य डाटा को पढ़कर उसे कम्प्यूटर में फ़ोटो और अन्य फॉरमेट के रूप में सेव करता है. इससे हम हार्डकॉपी को सॉफ्टकॉपी में परिवर्तित कर सकते हैं.

MICR Scanner:– MICR का प्रयोग बैंकिंग में अधिक किया जाता है. बैंक में अधिक संख्या में चेक जांचने में इनका प्रयोग होता है.

MICR Technology में चैक पर विशेष चुम्बकीये स्याही द्वारा कैरेक्टर छापे जाते है.

Opticle Scanner:- इसमें प्रकाशिए विधि से प्रकाश कैरेक्टर पर डाला जाता है. इसके उदहारण OCR, OMR and OBR.

OMR:- इसका पूरा नाम opticle Mark Reader है. यह एक ऐसी डिवाइस है जो OMR sheet पर पेंसिल या पेन के चिन्ह की उपस्थिति और अनुपस्थिति को जा की उपस्थिति और अनुपस्थिति को जंचती है. आजकल इसका प्रयोग Competitive examinition की Answre Book को चेक किया जाता है. इसके प्रयोग से कम समय में सही परिणाम आ जाते हैं.

OCR:- इसका पूरा नाम Opticle Character Recognition है.

OCR के फोन्ड कंप्यूटर में स्टोर रहते है. जिन्हें ओसीआर स्टैंड हैं कहते. इसमें Latter, Number and Special Symbol होते हैं.  

joystick:- इसका प्रयोग कम्प्यूटर में गेम्स खेलने के लिए किया जाता है.

Trackball :- यह एक Pointer डिवाइस है. यह माउस के समान कार्य करती है. इसमें एक उभरी हुई गेंद होती है. इसकी सहायता से गेम्स भी खेले जाते हैं. यह कम जगह घेरता है. इसमें केवल गेंद को घुमाना पड़ता है, पूरी ट्रैकबॉल डिवाइस को नहीं.

Light pen:- लाइट पेन का प्रयोग कम्प्यूटर स्क्रीन पर कोई चित्र या का आकृति का निर्माण करने के लिए किया जाता है. यह भी एक पॉइंटर डिवाइस है. आजकल इसका प्रयोग CAD के कार्यो में अधिक हो रहा है.

Touch Screen :- Touch Screen का प्रयोग आजकल बैंकिंग, रेल्वे, एयरपोर्ट एवं लाइब्रेरी में कैटलाँन फाइल को ढूंढने में किया जा रहा है

Digitizing Tablet Graphic Table:

Digitizing tablet एक Drawing सतह होती है. इसके साथ एक Pen या Mouse होता है. इस Table पर पतले तारों का जाल होता है. जिस पर पेन चलाते ही संकेत कम्प्यूटर में चले जाते हैं.

Voice Recognition :- इसकी सहायता से हम डाटा को कम्प्यूटर बोलकर इनपुट करा सकते हैं.

Bar Code Reader (BCR):- BCR का प्रयोग व्यासायिक छेत्र में किया जाता है. इससे उत्पाद (Product) के पैकेट के ऊपर छपे हुये बार कोड की पढने के लिए किया जाता है.

Offline Input Device:- वे डिजाईस जो कम्प्यूटर से Plug किये बिना डाटा को Collect करके कम्प्यूटर में इनपुट करती है. ऑफ लाईन इनपुट डिवाइस कहलाती है. कैमरा एक ऑफलाइन इनपुट डिवाइस है.

Degital Camera:– यह एक ऑफ लाइन इनपुट डिवाइस है इसका प्रयोग फोटो खींचने एवं स्टोर करने के लिए किया जाता है |

Output Devices

Monitor:- Monitor एक आउटपुट डिवाइस है. इसको विजुअल डिस्प्ले यूनिट भी कहा जाता है.

CRT (Cathode Ray Tube) Monitor

Flat Panel Monitor:- यह नई तकनीकी के मोनिटर है | इसमें LCD (Liquid Crystal Display) Technology का प्रयोग होता है | आज की नई तकनीकी LTD है | जिसका पूरा नाम Light emitting diode है |

मोनिटर के मुख्य लक्षण (Characteristics of a Monitor):

  1. Resolution (रेजोलूशन):- Display device का महत्वपूर्ण रेजोलूशन या स्क्रीन की चित्र की स्पष्टता होता है. मॉनिटर में चित्र का निर्माण छोटे छोटे बिन्दुओं से मिलकर होता है. जिसे पिक्सेल कहा जाता है जब वह बिंदु चमकते हैं.
  2. Refresh Rate:- मॉनीटर से रिफ्रेश रेट को हर्टज में मापा जाता है.
  3. Dot Pitch:- डॉट पिच एक प्रकार की मापन तकनीकी है. कलर मॉनिटर की डॉट पिच 0.15 MM से .30 MM तक होती है.
  4. Interlacing or non Interlacing:- यह एक ऐसी डिस्प्ले तकनीकी है | जो की कम्प्यूटर से रेजोलूशन की गुणवत्ता में और अधिक वृधि करती है |
  1. Bit Mapping:- जिसमें टैक्स और ग्राफिक्स दोनों को प्रदर्शित किया जा सकता है वह बिट मैपिग कहालती है | इससे ऑपरेटर किसी भी आकृति को स्क्रीन पर बनाया जा सकता है |

Printer

Printer एक ऑनलाइन आउटपुट डिवाइस है. इससे आउटपुट को कागज पर छाप कर प्रस्तुत किया जाता है. कागज पर लिए गये आउटपुट को Hard Copy कहा जाता है |

Printering Technology  के आधार पर प्रिंटर्स दो प्रकार के होते हैं |

यह वे प्रिंटर होते हैं | जो printing करते समय आवाज करते है | इसलिए इसको impact printer कहते है |

Impact प्रिंटर दो प्रकार के होते हैं |

  1. Draft Quality Printerning:- इसमें समान्य छपाई होती है |
  2. Near latter Quality Printerning:- इस printing में एक अक्षर को दो बार छपा जाता है |

Solid Printer

Daisy wheel Printer:- यह एक ठोस मुद्राक्षर(Solid font Printer) impact Printer है | इसके printing हैड में एक चक्र (Wheel) होता है | जिसके प्रत्येक ताने पर एक अक्षर उभरा रहता है |

Printing के आधार पर Line printer तीन प्रकार के होते है |

Line Printer:- लाइन प्रिंटर वी होते है जो एक बार में एक लाइन को प्रिंट करते है |

  1. Chain printer:- इस प्रिंटर में एक चैन होती है | जिसे printing चैन कहते हैं
  2. Band printer :- इस प्रिंटर में एक बंद होता है जिसे printing band कहते है|
  3. Drum Printer :- इस प्रिंटर में एक ड्रम होता है | जिस पर ठोस अक्षर चिपके रहते हैं |

Non Impact Printer

Non Impact Printer वे प्रिंटर होते है |जो printing करते समय आवाज नही करते है | Non Impact printer दो प्रकार के होते है |

  1. Ink Jet Printer
  2. Laser Printer

Ink jet Printer:- Ink jet printer एक Non impact printer है | रंगीन इंकजेट से स्याही के चार नोलेज होते है | नीलम, लाल, पिला काला इसलिए इसको क्य्म्क प्रिंटर भी कहा जाता है |

इसके इसकी printing क्वालिटी प्रायः 300 DPI (dot per Inch) होती है |

Laser Printer:- यह एक नॉन इम्पैक्ट पेज प्रिंटर होते है | इसका प्रयोग कम्प्यूटर में 1970 के दशक से किया जा रहा है |

इसकी printing क्वालिटी 300 to 600 DPi तक होती है जो सर्वश्रेठ होती है | इसकी गति को ppm में नापा जाता है | आजकल इनकी कीमत कम हो गयी है |

Plotter

यह एक आउटपुट डिवाइस है इससे चित्र एवं ग्राफ को प्रिंट किया जाता है. यह 3 D प्रिंटिंग भी कर सकते हैं. इसके द्वारा बैनर-पोस्टर इत्यादि आदि को प्रिंट किया जाता है.

यह दो प्रकार के होते हैं:

1. Drum pen plotter
2. Fletbed plotter

Sound Card & Speaker

साउंड कार्ड एक एक्सटेंशन बोर्ड होता है जिसका प्रयोग साउंड के क्वालिटी को बढ़ाने-घटाने में होता है.

है.                           

Chapter 2: कंप्यूटर का विकास (Development of Computer) Chapter 3: कंप्यूटर मेमोरी क्या होता है (What is Memory in Computer in Hindi)

 

इसे भी पढ़ें: Download Free Computer Awareness PDF in Hindi

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