भारत में शिक्षा की नीतियां और इकाइयां – Policies and Units of Education in India

दोस्तों आज मैं भारत में शिक्षा की नीतियां और इकाइयां से जुड़े पहलुओं पर ध्यान डालूंगी, किसी भी टीचर eligibility टेस्ट में बहुत ज्यादा आने वाले टॉपिक में से एक है Policies and Units of Education in India. उम्मीद है इसे पढ़ कर आपके सारे सवालों के उत्तर मिल जाएँगे.

राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा ( NCF ) – 2005 ( National Curriculum Framework )

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 का अनुवाद संविधान की आठवीं अनुसूची में दी गई सभी भाषाओं में किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एनसीईआरटी की कार्यकारिणी ने 14 एवं 19 जुलाई 2004 की बैठकों में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या को संशोधित करने का निर्णय लिया।  राष्ट्रीय पाठ्यचर्या दस्तावेज का आरंभ रविंद्र नाथ टैगोर के निबंध सभ्यता और प्रगति के एक उदाहरण से होता है।

 पाठ्यचर्या निर्माण निर्देशक ( Curriculum Guiding )

  •  ज्ञान  को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना।
  •  पढ़ाई रटंत प्रणाली से मुक्त हो यह सुनिश्चित करना।
  •  पाठ्यचर्या का इस तरह संवर्धन की वह बच्चों को चौमुखी विकास के अवसर मुहैया कराए बजाय इसके की पाठ्यपुस्तक केंद्रित बनकर रह जाए।
  •  परीक्षा को अपेक्षाकृत अधिक लचीला बनाना और कक्षा की गतिविधियों से जोड़ना।
  •  एक ऐसी अधिभावी पहचान का विकास जिसने प्रजातांत्रिक राज्य व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय चिंताएं समाहित हो।

NCF के अनुसार कक्षा कक्ष में पाठ्य सामग्री क्रियाएँ

  • NCF ने परिचर्चा में समूह चर्चा पर बल दिया
  • NCF ने नाटक प्रस्तुति वाचन गायन आदि पर बल दिया
  • NCF ने पोस्टर चित्र और स्वयं आरेख बनाने पर बल दिया
  • NCF ने समुद्र सामुदायिक गतिविधियों पर बल दिया
  • NCF ने उत्पादक की गतिविधियां सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियों पर बल दिया
  • NCF ने खेलकूद NCC, NSS गतिविधियों पर बल दिया
  • NCF ने भ्रमण और क्लब गठन जैसी गतिविधियों पर प्रकाश डाला

 NCF के अनुसार आकलन में लचीलापन

  • NCF के अनुसार परीक्षा हॉल में कागज कलम से ली गई परीक्षा के अलावा मूल्यांकन के बहू बहुविधि रूप होने चाहिए
  • मौखिक परीक्षा और समूह कार्य मूल्यांकन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए
  • खुली पुस्तक परीक्षा और लचीली समय सीमा रहित परीक्षा को देशभर में प्रायोगिक तौर पर लागू करने पर बल दिया
  • परंपरागत परीक्षा पत्ती को भी बेहतर तरीके से प्रश्न पत्र प्यार करो और विद्यार्थियों को वांछनीय जानकारी जैसे त्रिकोणमितीय आकर्ति नक्शे के इतिहास की तिथियां सूत्र आदेश देकर इस दिशा में मोडा जा सकता है।
  • परीक्षा प्रणाली को अधिक मुक्त लचीला रचनात्मक तथा सरल बनाना।
  • स्कूल के अंत की बोर्ड परीक्षा और स्पर्धात्मक प्रवेश परीक्षाओं को अलग करने पर बल देना।

 केंद्रीय विद्यालय संगठन Kendriya Vidyalya Sangathan (KVS)

  केंद्रीय विद्यालय की स्थापना नवंबर 1962 में हुई

केंद्रीय विद्यालय के मिशन (MISSION OF KVS)

  • विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में गति और श्रेष्ठता लेकर आना।
  • बच्चों में भारतीयता और राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीयता एकता का विकास करना।
  • CBSE और NCRT इत्यादि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में नए नए प्रयोग को सम्मिलित करना।
  • केंद्रीय सरकार के स्थानांतरण य कर्मचारियों जिनमें रक्षा तथा अर्ध सैनिक बलों के कर्मी भी शामिल है,कि बच्चों की शिक्षा के सामान्य कार्यक्रम के तहत शिक्षा प्रदान कर उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BETI BACHAO BETI PADHAO)

हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस योजना की सबसे पहले 22 जनवरी 2015 को पानीपत हरियाणा से शुरुआत की।  प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण के दौरान कहा कि जन समूह में ऐसे लोग हैं जो पढ़ी लिखी बहू वे चाहते हैं लेकिन वह अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए तैयार नहीं है।  उन्होंने कहा कि यह भेदभाव खत्म कर देना चाहिए।  प्रधानमंत्री जी ने कल्पना चावला का सम्मान करते हुए जनसमूह को समझाया कि लड़कियां बहुत आगे तक जा सकती है।  वह शिक्षा, खेलों, विज्ञान, सेना आदि में घर वालों का नाम रोशन कर सकती है।  प्रधानमंत्री जी ने बालिकाओं के लाभ के लिए सुकन्या समृद्धि खाता का शुभारंभ किया।  इस योजना का लक्ष्य लड़कियों को पढ़ाई के जरिए सामाजिक और वित्तीय तौर पर आत्मनिर्भर बनाना है।

सर्व शिक्षा अभियान

SARVA SHIKSHA ABHIYAN (SSA)

सर्व शिक्षा अभियान भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसकी शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के काल में हुई।  सर्व शिक्षा अभियान 2000 से 2001 में शुरू किया गया।  इस का उद्देश्य शिक्षा की सार्वभौमिकता (UNIVERSALIZATION), सुलभता (ACCESSIBILITY) और प्रतिधारण (RETENTION) अथवा शिक्षा का ग्रहण करना था।  सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा में बालक बालिका और सामाजिक श्रेणी के अंतर को दूर करने का प्रयास किया गया।  इसके माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा मिला जैसे कि नए नए स्कूलों का खोला जाना वैकल्पिक स्कूली सुविधाएं प्रदान करना अतिरिक्त अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण करना प्रसाधन कक्ष (TOILETS) एवं पेयजल सुविधा प्रदान करना, और अध्यापकों का प्रावधान करना , नियमित अध्यापकों का सेवाकालीन प्रशिक्षण, निशुल्क पाठ्य पुस्तक एवं वर्दियां व अधिगम स्तर परिणामों में सुधार हेतु सहायता प्रदान करना शामिल है।  इसके अंतर्गत शिक्षा को रणनीतियां एवं मानदंडो के अंतर्गत लिया गया।

सर्व शिक्षा अभियान के सिद्धांत (PRINCIPLE OF SSA)

  • सर्व शिक्षा अभियान के अनुसार  शमिता का अर्थ केवल समान नहीं है बल्कि ऐसी स्थितियों का समावेश है जिसमें समाज के अपहृत वर्ग (अनुसूचित जाति) मुस्लिम अल्पसंख्यक, भूमिहीन कृषि कामगारों के बच्चे और विशेष वर्ग वाले बच्चे आदि शामिल है अर्थात यह सभी शिक्षा के समान अवसर का लाभ उठा सके।
  • सर्व शिक्षा अभियान के अनुसार पहुंच शब्द का अर्थ स्कूलों की दूरी से ना होकर इससे है कि स्कूलों का अनुसूचित जातियों, अन्य वर्गों मुस्लिम अल्पसंख्यक, सामान्य रूप से लड़कियां और विशेष जरूरत वाले बच्चों की पहुंच से दूर ना होना।
  •  इसके अनुसार बालक बालिका को बराबर समझ ना यह केवल कहने की बात नहीं है बल्कि शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति 1986 से 92 में बताए गए परिप्रेक्ष्य पर परी क्षेत्र परिपेक्ष्य में शिक्षा को देखना अर्थात महिलाओं की स्थिति में बुनियादी परिवर्तन लाने को बढ़ावा देना।
  •  कक्षा कक्ष के माध्यम से संस्कृति की सृजनात्मकता को बढ़ावा देना ताकि लड़कियों और पिछड़े हुए बालकों के लिए समावेशी परिवेश उत्पन्न हो सके।
  • शिक्षा के अनुसार (RTE) के माध्यम से अध्यापकों, अभिभावकों, शैक्षिक पर शासकों द्वारा दंडात्मक प्रक्रियाओं को रोकने तथा उनके नैतिक मूल्यों के अनुसार बांधना।
  • इसके अनुसार शिक्षा का संपूर्ण दृष्टिकोण और पाठ्यक्रम, शिक्षक शिक्षा , शैक्षिक योजना आदि के साथ-साथ संपूर्ण सामग्री और शिक्षा की प्रक्रिया को क्रमबद्ध बनाना।

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन (NATIONAL LITERACY MISSION)

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन 5 मई 1988 में स्थापित किया गया।  जिसका उद्देश्य शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देना है।  इसकी स्थापना भारत के प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी के काल के कार्यकाल के दौरान हुई।  राष्ट्रीय साक्षरता मिशन मुख्य तक रोड व्यक्तियों की शिक्षा के लिए लागू किया गया जिस दिन की आयु 15 से 35 वर्ष है।  यह शिक्षा उन प्रोड व्यक्तियों के लिए बनाई गई जिन्होंने शिक्षा अवसर गंवा दिया था या व्यक्ति जिन्होंने औपचारिक शिक्षा आयु को पार कर लिया है कर दिया है।  अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (INTERNATIONAL LITERACY DAY) विश्व में 8 सितंबर को मनाया जाता है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय

KASTURBA GANDHI BALIKA VIDYALYA (KGBV)

सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए तथा अल्पसंख्यक शहरी क्षेत्रों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित किए गए।  इन विद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, अन्य पिछड़ा वर्ग, सिर पर मैला ढोने वाले परिवारों की बालिकाओं, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं , सेक्स वर्कर परिवारों की बालिकाएं उच्च प्राथमिक कक्षाओं ( 6, 7 and 8) में निशुल्क अध्ययन करती है।  इन सभी बालिकाओं को सारी सुविधाएं निशुल्क दी जाती है।  राज्य में कुल 200 KGBV संचालित है.

KGBV के उद्देश्य और संकल्पना (AIM AND DOMAIN OF KGBV)

इन विद्यालयों का उद्देश्य वंचित वर्गों की उन बालिकाओं को जोड़ना है, जो कठिन परिस्थितियों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले स्थानों में रहते हुए किसी भी कारणवश विद्यालयों में नहीं जा सकी अथवा जिनकी आयु कक्षा में अन्य बालिकाओं से अधिक हो चुकी है।

KGBV की निशुल्क सुविधाएं

  • पुस्तके  तथा शिक्षण सामग्री का निशुल्क उपलब्ध करवाना।
  • सभी बालिकाओं को आवास निशुल्क देना।
  • दैनिक उपयोग की वस्तुएं तथा साबुन, तेल, तोलिया, टूथपेस्ट, कंघा, चप्पल, सेनेटरी इत्यादि निशुल्क देना।
  • प्रतिमाह सो रुपए बालिकाओं के व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा।
  • स्कूल वर्दी स्वेटर जूते-मोजे निशुल्क देना।

KGBV में प्रदत प्रशिक्षण

  • खेलकूद प्रतियोगिताएं
  • कंप्यूटर प्रशिक्षण
  • NIOS मान्यताप्राप्त व्यवसायिक प्रशिक्षण
  • बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
इसे भी पढ़ें: Basic Process of Teaching and Learning in Hindi
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